यूरोप में सदी की सबसे भीषण गर्मी - नदियां सूखीं, द्वितीय विश्व युद्ध के डूबे जहाज दिख रहे

यूरोप में सदी की सबसे भीषण गर्मी - नदियां सूखीं, द्वितीय विश्व युद्ध के डूबे जहाज दिख रहे

The Jagran News: यूरोप में सदी की सबसे भीषण गर्मी - नदियां सूखीं, 80 साल बाद बाहर आए द्वितीय विश्व युद्ध के डूबे जहाज
यूरोप इस वक्त सदी की सबसे भयानक गर्मी और सूखे की मार झेल रहा है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि यूरोप की दूसरी सबसे लंबी नदी 'डेन्यूब' का जलस्तर ऐतिहासिक रूप से नीचे गिर गया है। इस सूखे की वजह से 80 साल बाद एक हैरान करने वाला नज़ारा सामने आया है—1944 में द्वितीय विश्व युद्ध (WWII) के दौरान डूबे दर्जनों जर्मन युद्धपोत अब पानी से बाहर आ गए हैं।


नदी में तैरता मौत का सामान
अनुमान है कि इस नदी की तलहटी में ऐसे करीब 200 जहाज दबे हैं, जिनमें से 20 से ज्यादा के अवशेष अब साफ नजर आने लगे हैं। सबसे बड़ा अलर्ट यह है कि इन जहाजों में अभी भी भारी मात्रा में अनएक्सप्लोडेड (unexploded) विस्फोटक और गोला-बारूद लदे हुए हैं, जो स्थानीय लोगों और नेविगेशन के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं।


सूखे ने रोकी रफ्तार, बदली दिनचर्या
 * सिमटता व्यापार: नदी में जहाजों के आने-जाने का रास्ता सिमटकर सिर्फ 100 मीटर रह गया है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और ट्रांसपोर्टेशन को भारी नुकसान हो रहा है।
 * रात में हो रही खेती: भयंकर लू और 40 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान के चलते किसानों की जिंदगी बदल गई है। दिन में झुलसती गर्मी के कारण अब किसान रात के अंधेरे में खेतों में काम करने को मजबूर हैं।
 * ब्रिटेन की इकोनॉमी को बड़ा झटका: ब्रिटेन में हीटवेव के कारण पिछले दो महीनों में अर्थव्यवस्था को करीब 5.7 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। अत्यधिक गर्मी से कामकाज और प्रोडक्टिविटी बुरी तरह प्रभावित हुई है।